उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले का एक युवक इस वक्त सऊदी अरब में फंसा हुआ है। उसने एक भावुक वीडियो जारी कर भारत सरकार और देशवासियों से मदद की अपील की है।
वीडियो में वह कहता है — “मेरा पासपोर्ट ले लिया गया है, मुझे घर जाना है, नहीं तो मैं मर जाऊँगा।”
उसकी आंखों में डर, और आवाज़ में बेबसी साफ झलक रही है।
युवक का दर्द: “मुझे भारत वापस जाना है”
वीडियो में युवक अपने गांव का नाम प्रयागराज बताता है और कहता है कि वह एक एजेंट के जरिए सऊदी आया था।
लेकिन वहां पहुँचते ही उसका पासपोर्ट छीन लिया गया और उसे जबरन काम कराया जा रहा है।
वह कहता है —
“मैंने कहा कि मुझे वापस भेज दो, लेकिन वो सुनता नहीं। मुझे डर लगता है, माँ बीमार है, घर जाना है।”
वीडियो में पीछे रेगिस्तान और ऊँट दिखाई देते हैं, जिससे पता चलता है कि वह किसी दूरस्थ क्षेत्र में काम करता है।
यह दृश्य प्रवासी भारतीयों की वास्तविक कठिनाइयों की याद दिलाता है।
प्रवासी मजदूरों की सच्चाई: Gulf countries में संघर्ष
भारत से हर साल लाखों लोग Gulf countries में रोजगार की तलाश में जाते हैं।
अधिकांश मजदूर कम पढ़े-लिखे होते हैं और एजेंटों के भरोसे विदेश पहुंचते हैं।
वहां जाकर कई बार उन्हें “Kafala System” का सामना करना पड़ता है — जिसमें नियोक्ता के पास वीज़ा और पासपोर्ट की पूरी जिम्मेदारी होती है।
यदि नियोक्ता चाहे तो श्रमिक को रोक भी सकता है।
इस सिस्टम में फंसे कई भारतीय वर्षों तक अपने परिवारों से दूर रहते हैं।
यह युवक भी इसी सिस्टम का शिकार प्रतीत होता है।
भारत सरकार और दूतावास की कार्रवाई
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने कहा है कि वे युवक की पहचान और लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, वीडियो में सटीक स्थान और संपर्क जानकारी न होने से खोज मुश्किल हो रही है।
प्रयागराज प्रशासन को युवक के परिवार से संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूतावास ने कहा है कि किसी भी भारतीय नागरिक की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है, और हरसंभव मदद की जाएगी।
परिजनों की हालत: हर फोन पर उम्मीद और डर
युवक के घर में मातम और बेचैनी का माहौल है।
परिवार ने बताया कि कुछ हफ्ते पहले तक वह फोन पर बात करता था, लेकिन अब उसका संपर्क टूट गया है।
वीडियो देखकर परिवार की उम्मीदें फिर जागीं, लेकिन साथ ही डर भी बढ़ गया है।
उसकी माँ कहती हैं —
“वो कह रहा है कि मर जाएगा, हमें नहीं पता वो कहाँ है। बस भगवान उसे सुरक्षित रखे।”
परिवार ने राज्य सरकार और केंद्र से अपील की है कि जल्द से जल्द उसे भारत वापस लाया जाए।
सोशल मीडिया पर समर्थन की लहर
जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर आया, देशभर से लोगों ने #SaveIndianWorker और #BringHimHome जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए।
हजारों यूज़र्स ने युवक की मदद के लिए अपनी आवाज़ उठाई।
कई सामाजिक संगठनों और एनआरआई समूहों ने भी भारत सरकार से दूतावास स्तर पर कार्रवाई तेज करने की मांग की।
सोशल मीडिया ने एक बार फिर दिखाया कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म आज केवल मनोरंजन का नहीं, बल्कि मानवता की आवाज़ बन चुका है।
विशेषज्ञों की राय: प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर सवाल
भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी जनसंख्या वाला देश है।
करीब 80 लाख भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं, जिनमें से अधिकतर निम्न-आय वर्ग से आते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपने प्रवासी श्रमिकों के लिए “Emergency Tracking System” बनाना चाहिए,
ताकि किसी भी संकटग्रस्त भारतीय का लोकेशन और स्टेटस तुरंत पता लगाया जा सके।
साथ ही, हर राज्य सरकार को विदेश जाने वाले नागरिकों का रजिस्टर रखना चाहिए।
इससे ऐसी घटनाओं की संभावना कम होगी और समय पर मदद मिल सकेगी।
सच्चाई या भ्रम: वीडियो की जांच जरूरी
कुछ विदेशी एजेंसियों का कहना है कि हर वायरल वीडियो असली नहीं होता।
कई बार लोग सोशल मीडिया पर ध्यान खींचने या सहानुभूति पाने के लिए भी ऐसे वीडियो बनाते हैं।
इसलिए इस वीडियो की भी सत्यता की जांच जरूरी है।
लेकिन असल या झूठा — यह वीडियो एक गंभीर सच्चाई उजागर करता है।
भारतीय प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और उनके अधिकार अब भी एक चुनौती बने हुए हैं।
सरकार की जिम्मेदारी और समाज की भूमिका
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कोई भी भारतीय नागरिक विदेश में फंसा हो, तो उसे अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि किसी के पास उस युवक की पहचान या परिवार से जुड़ी जानकारी है,
तो तुरंत स्थानीय प्रशासन या दूतावास को सूचित करें।
इस घटना से यह भी स्पष्ट हुआ है कि समाज और सरकार दोनों को मिलकर प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
निष्कर्ष: एक पुकार जो पूरे भारत को झकझोर गई
यह कहानी सिर्फ एक युवक की नहीं, बल्कि उन हजारों भारतीयों की है जो अपने परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए विदेश जाते हैं।
सपनों की धरती कभी-कभी उनके लिए दर्द का रेगिस्तान बन जाती है।
सऊदी में फंसे इस युवक की पुकार “मैं मर जाऊँगा…” किसी खबर से बढ़कर एक इंसानी भाव है।
यह हमें याद दिलाती है कि विकास तभी सार्थक है जब हर भारतीय, चाहे वह कहीं भी हो, सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।


